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Raipur chhattisgarh VISHESH राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम्स (आईकेएस सेल) द्वारा महिला दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह का विषय द इंटेलेक्चुअल लेगेसी ऑफ वूमेन इन भारतीय ज्ञान परंपरा विथ स्पेशल रेफरेंस टू एंशिएंट इंडिया (प्री-कोलोनियल पीरियड) था। यह कार्यक्रम 9 मार्च 2026 को आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव रहे। इसके अलावा, कार्यक्रम में एनआईटी रायपुर की प्राइम मिनिस्टर प्रोफेसर डॉ. अर्चना शर्मा, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर और डीन (अकादमिक) डॉ. शुभ्रता गुप्ता तथा श्रीमती ज्योति रमना राव को सम्माननीय वक्ताओं के रूप में आमंत्रित किया गया। इस दौरान डॉ. तोषण मीनपाल, डॉ. मधुकृष्णा प्रियदर्शिनी ,अन्य गणमान्य अतिथि, फैकल्टी मेम्बर्स, स्टाफ और विद्यार्थी मौजूद रहे ।
समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात डॉ. प्रियदर्शिनी ने कार्यक्रम और विषय के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महिलाएं देश के भविष्य में समान रूप से योगदान कर रही हैं, और सुंदरता से कहा कि जब एक महिला सीखती है, तो पूरा परिवार सीखता है और जब एक महिला ऊपर उठती है, तो पूरा समाज उठता है। डॉ. मीनपाल ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल महिलाओं को शुभकामनाएँ देने के लिए नहीं है, बल्कि महिलाओं के ऐतिहासिक योगदान को स्मरण करने के लिए है। उन्होंने बताया कि जब महिलाओं को कमजोर और अशिक्षित माना जाता था, तब भी हमारी संस्कृति ने उनकी शक्ति को पहचाना और उनका सम्मान किया।
डॉ. राव ने आईकेएस सेंटर को महिलाओं के योगदान को उजागर करने वाले यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित करने पर बधाई दी। उन्होंने इतिहास की विदुषियों एवं वर्तमान की नारी शक्तियों का उल्लेख कर उनके असामान्य बल और देश के प्रति योगदान को सराहनीय बताया। उन्होंने नारी शक्तियों को खुद को कमज़ोर ना समझने, अपने काम में आत्मविश्वासी बने रहने, खुद को शिक्षित करने, विभिन्न कौशल सीखने और जीवन में तनाव ना लेने के सुझाव दिए।
इसके पश्चात मुख्य वक्ता डॉ. . वर्णिका शर्मा ने संचालन ने अपने उद्बोधन में बताया कि वैदिक काल में महिलाओं को अपने जीवनसाथी चुनने का मूल अधिकार था, और आठ प्रकार के वैध विवाह मान्यता प्राप्त थे। इस समय की विदुषियों, जैसे माता गार्गी, ने ब्रह्म-ज्ञान में इतनी गहन समझ दिखाई कि उन्होंने याज्ञवल्क्य जैसे महर्षियों को भी चुनौती दी। गार्गी का मनु-गार्गी संवाद उपनिषदों के दर्शन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। गार्गी और अन्य महिला विद्वान समाजकल्याण के लिए तार्किक संवाद (तर्क) में सक्रिय रूप से भाग लेती थीं। ये उदाहरण यह दर्शाते हैं कि उस समय महिलाओं को आध्यात्मिक और बौद्धिक समानता प्राप्त थी और वे उच्चतम दार्शनिक विमर्श में सक्रिय भागीदार थीं। साथ ही उन्होंने आज की महिलाओं को वैदिक काल की नारी शक्तियों से सीख लेने और उनके बारे में पढ़ने पर प्रोत्साहित किया ताकि हम आने वाली पीढ़ियों को भी उनकी जीवनी एवं योगदान के बारे में बता सकें।
श्रीमती राव ने कहा कि यह दिन हमें याद दिलाता है कि हर दिन महिला दिवस है और हम अपनी उत्कृष्टता का हर दिन उत्सव मना सकते हैं। उन्होंने प्राचीन ग्रंथों में का उल्लेख करते हुए कहा कि उस काल में भी महिलाओं को शिक्षा का अधिकार था और उन्होंने उच्च पदों तक पहुँच हासिल की। इतिहास में महिलाओं ने महत्वपूर्ण बौद्धिक विरासत छोड़ी, जो आने वाले समय के लिए मानक बनी।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि वैदिक काल में महिलाओं का समाज में विशेष महत्व था। वे राजनीतिक सलाहकार और नैतिक विचारक के रूप में समाज और निर्णयों को प्रभावित करती थीं। उनकी बुद्धिमत्ता और नेतृत्व क्षमता उस समय की सामाजिक संरचना में मील का पत्थर साबित हुई। डॉ. अर्चना शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि प्राचीन काल से आज तक महिलाओं का समाज में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आज महिलाएं अपनी स्वतंत्रता का उपयोग करके सार्थक और सकारात्मक कार्य कर रही हैं। उनकी सक्रिय भागीदारी समाज और विकास में नई दिशा प्रदान कर रही है।
इस महिला दिवस समारोह का उद्देश्य भारतीय परंपरा में महिलाओं की बौद्धिक एवं सामाजिक भूमिका को उजागर करना और छात्रों एवं संकाय सदस्यों के बीच शैक्षणिक संवाद को प्रोत्साहित करना था। इस कार्यक्रम का समापन डॉ. मीना मुर्मू के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के गायन के साथ हुआ।








