

प्रविष्टि तिथि: 18 FEB 2026 6:43PM by PIB Raipur
रायपुर, 18 फरवरी, 2026: सूचना युग में विश्वसनीय आंकड़ों को सुशासन की आधारशिला बताते हुए पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति श्री सच्चिदानंद शुक्ल ने कहा कि नीति निर्माण, योजना निर्माण तथा निर्णय प्रक्रिया में सांख्यिकी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रामाणिक और विश्वसनीय जानकारी रखने वाले संस्थान समय के साथ रणनीतिक बढ़त प्राप्त करते हैं।

वे विश्वविद्यालय के सांख्यिकी अध्ययन शाला द्वारा राष्ट्रीय सांख्यिकी तंत्र प्रशिक्षण अकादमी के सहयोग से एम. एल. श्रॉफ सभागार में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला “आधिकारिक सांख्यिकी तथा भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली के प्रति जागरूकता एवं संवेदनशीलता” के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सांख्यिकी का दायरा निरंतर विस्तृत हो रहा है तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों का उपयोग सांख्यिकीय विश्लेषण को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने उच्च शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए द्वैध उपाधि कार्यक्रमों तथा संसाधन साझेदारी जैसे शैक्षणिक नवाचारों का भी उल्लेख किया।

राष्ट्रीय सांख्यिकी तंत्र प्रशिक्षण अकादमी, जो भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन कार्यरत है, क्षमता निर्माण के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में कार्य करती है। यह अकादमी सर्वेक्षण पद्धति, आंकड़ा विश्लेषण, यांत्रिक अधिगम तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करती है। कार्यशाला का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा अन्य हितधारकों को आधिकारिक सांख्यिकी और भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली की संरचना एवं महत्व से अवगत कराना था।

मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर के उप महानिदेशक श्री अल्ताफ हुसैन हाजी उपस्थित थे। राष्ट्रीय सांख्यिकी तंत्र प्रशिक्षण अकादमी के निदेशक श्री शिव बालक वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, रायपुर की उप निदेशक सुश्री सचिता राकेश अग्रवाल भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं।

सांख्यिकी अध्ययन शाला के अध्यक्ष प्रोफेसर डी. के. गंगेश्वर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
अपने संबोधन में श्री अल्ताफ हुसैन हाजी ने आधिकारिक तथा प्रशासनिक सांख्यिकी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए जनगणना और आर्थिक गणना सहित विभिन्न सर्वेक्षण प्रक्रियाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सांख्यिकीय साक्षरता वर्तमान समय की आवश्यकता है और इस क्षेत्र में युवाओं के लिए व्यापक रोजगार अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए सांख्यिकी के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि श्री शिव बालक वर्मा ने कहा कि आंकड़े आज राष्ट्रीय संपदा के रूप में उभर रहे हैं तथा किसी भी देश के विकास का आकलन अब आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। उन्होंने सांख्यिकी को विकास की “व्याकरण” बताते हुए आंकड़ा विज्ञान की बढ़ती उपयोगिता पर बल दिया।
सुश्री सचिता राकेश अग्रवाल ने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की भूमिका तथा संचालित विभिन्न सर्वेक्षणों की विस्तार से जानकारी दी और बताया कि आधिकारिक आंकड़े नीति निर्माण, निगरानी तथा मूल्यांकन की प्रक्रिया में किस प्रकार सहायक सिद्ध होते हैं।
कार्यशाला में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी तथा विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। विचार-विमर्श के दौरान नीति निर्माण और सुशासन में आधिकारिक सांख्यिकी की भूमिका, आंकड़ों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता, पारदर्शिता तथा नैतिक मानकों के महत्व के साथ-साथ आंकड़ा संकलन, संकलन-पश्चात संसाधन और प्रसार से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई








