




राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में 18 फरवरी 2026 को चार नव-निर्मित स्मार्ट कक्षाओं F-39, G-37, G-4 और G-41 का उद्घाटन किया गया। इन कक्षाओं का विकास वर्ष 1992 एवं 1994 बैच के पूर्व छात्रों, एसबीएल एनर्जी लिमिटेड तथा मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के 1985 बैच के श्री नंद कुमार वर्मा के उदार सहयोग से किया गया है। यह पहल संस्थान की शैक्षणिक अधोसंरचना और शिक्षण सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उद्घाटन समारोह में एन आई टी रायपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के माननीय अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने आधुनिक कक्षाओं का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव, विभिन्न बैचों के पूर्व छात्र एवं उनके परिवारजन, श्री मनोज प्रधान, सभी अधिष्ठाता (डीन), एसोसिएट डीन (कॉर्पोरेट रिलेशंस एंड रिसोर्स मोबिलाइजेशन), सीआर एंड आरएम कार्यालय की टीम, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

एनआईटी रायपुर की स्मार्ट क्लासरूम पहल, विशिष्ट पूर्व छात्रों और उद्योग जगत के सहयोग से कक्षा अधोसंरचना को आधुनिक बनाने का एक सराहनीय प्रयास है। अब तक इस पहल के अंतर्गत दस से अधिक कक्षाओं को स्मार्ट कक्षाओं में परिवर्तित किया जा चुका है और निकट भविष्य में सभी कक्षाओं को स्मार्ट कक्षाओं में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन कक्षाओं में एर्गोनॉमिक डिज़ाइन की बेंचें, उच्च गुणवत्ता वाले प्रोजेक्टर, इंटरएक्टिव स्मार्ट बोर्ड, सराउंड साउंड स्पीकर, एयर कंडीशनिंग प्रणाली तथा पंखों जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे विद्यार्थियों को आरामदायक एवं तकनीक-सक्षम शिक्षण वातावरण प्राप्त हो सके।
अपने संबोधन में डॉ. रमना राव ने कहा कि ये स्मार्ट कक्षाएँ विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विद्यार्थियों को सर्वोत्तम सुविधाएँ मिलनी चाहिए और संस्थान वैश्विक स्तर की अधोसंरचना उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. सुरेश हावरे ने पूर्व छात्रों एवं एलुमनाई एसोसिएशन की सराहना करते हुए उन्हें संस्थान की प्रेरणास्रोत शक्ति बताया। उन्होंने सभी पूर्व छात्रों से संस्थान के विकास में अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए निरंतर योगदान देने का आह्वान किया।
स्मार्ट क्लासरूम परियोजना एनआईटी रायपुर की गुणवत्ता, नवाचार और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह पहल आने वाले वर्षों में संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को और सुदृढ़ करेगी तथा विद्यार्थियों को एक सशक्त, तकनीक-समर्थित शिक्षण वातावरण प्रदान करेगी।








