

एचएनएलयू ने ‘द डब्लूटीओ@30: रीइमैजिनिंग मल्टीलेटरलिज़्म इन इंटरनेशनल ट्रेड लॉ’ पर 3-दिवसीय वैश्विक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया
कानूनी विशेषज्ञों और नीतिगत दिग्गजों ने संस्थागत नवीनीकरण, डिजिटल व्यापार और उभरते आर्थिक समूहों पर की चर्चा
प्रविष्टि तिथि: 06 OCT 2026 1:22PM
हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, रायपुर ने तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून शिखर सम्मेलन (ITLS) 2026 का सफलतापूर्वक समापन किया। “द डब्ल्यूटीओ@30: रीइमैजिनिंग मल्टीलेटरलिज़्म इन इंटरनेशनल ट्रेड लॉ” विषय पर केंद्रित इस शिखर सम्मेलन में प्रमुख शैक्षणिक विशेषज्ञों, कानूनी चिकित्सकों और नीति विश्लेषकों को वैश्विक व्यापार में वर्तमान व्यवधानों से निपटने और संस्थागत नवीनीकरण के मार्ग तैयार करने पर विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच पर लाया गया।

समापन दिवस पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें श्री सुमंत चौधरी (प्रधान सलाहकार – व्यापार नीति, सीआईआई); डॉ. ए. के. गर्ग (डिजिटल टेक-लॉ डिवीजन प्रमुख, आनंद एंड आनंद); प्रो. एंथनी (टोनी) कैंबस (मिसिसिपी के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून विशेषज्ञ); और सुश्री दिव्यश्री सूरी (एसोसिएट पार्टनर – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, लक्ष्मीकुमारन एंड श्रीधरन अटॉर्नी) शामिल हुए। वक्ताओं ने वैश्विक व्यापार प्रणाली की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की, इसके प्रभावी कामकाज में बाधा डालने वाली चुनौतियों की पहचान की और संस्थागत व नीतिगत नवीनीकरण के संभावित मार्गों पर सुझाव प्रस्तुत किए।
समापन सत्र में शुरुआती भाषण देते हुए एचएनएलयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन ने कहा कि वर्तमान दशक में व्यापक राजनीतिक विखंडन के कारण बहुपक्षवाद तेजी से खंडित हुआ है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में द्विपक्षीय और क्षेत्रीय व्यवस्थाओं का अपना वैध स्थान है, लेकिन वे बहुपक्षवाद के व्यापक ढांचे का स्थान नहीं ले सकतीं। साथ ही, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बहुपक्षवाद कुछ शक्तियों का एकाधिकार या फरमान नहीं बन सकता, बल्कि इसे वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में ब्रिक्स (BRICS) जैसे महत्वपूर्ण समूह की बढ़ती भूमिका और जिम्मेदारियों के आलोक में एक नया संतुलन खोजना होगा।
मद्रास उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और मुख्य अतिथि श्री पीबीएस गिरिधर ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून के विकास और बहुपक्षीय समझौतों को आकार देने में वकीलों तथा कानून के छात्रों के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि संस्थागत और कानूनी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में संवैधानिक मूल्य और संविधान ही मुख्य आधार बने रहने चाहिए।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि, इकोनॉमिक लॉ एसोसिएट्स के श्री सुहैल नैथानी ने बहुपक्षवाद की ताकतों और सीमाओं दोनों का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया। उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद को अंततः अपने हितधारकों के लिए ठोस परिणाम देने होंगे और चेतावनी दी कि यदि यह सार्थक परिणाम देने में विफल रहता है तो इसे अपने आप में अंतिम लक्ष्य नहीं माना जाना चाहिए। द्विपक्षीय निवेश संधियों (BITs) के अनुभव का संदर्भ देते हुए, उन्होंने हाल के दिनों में भारत के लिए उनके ठोस लाभों को नोट किया, जबकि स्वीकार किया कि बहुपक्षवाद की तब तक महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहेगी जब तक यह समानता, प्रभावशीलता और परिणाम देने में सक्षम है।
इस तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन ने व्यापार कानून को समकालीन आर्थिक, तकनीकी और नीतिगत विकास से जोड़ने वाला एक बहुविषयक मंच तैयार किया। 12 तकनीकी सत्रों के दौरान, 100 से अधिक प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इनमें डिजिटल व्यापार और डेटा गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन और स्थिरता, निवेश सुविधा, सेवाओं का उदारीकरण, व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा, विवाद निपटान, और डब्ल्यूटीओ के भीतर शक्ति असमानता जैसे समकालीन विषयों पर चर्चा की गई। शिखर सम्मेलन में छात्रों को बहुपक्षीय व्यापार वार्ताओं का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के लिए एक ‘मॉक डब्ल्यूटीओ’ अभ्यास भी आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में अनुसंधान अधिष्ठाता (डीन रिसर्च) प्रो. विष्णु कूनरायार ने सभी का स्वागत किया, जबकि आईटीएलएस के संयोजक और डब्ल्यूटीओ एवं वाइपो केंद्र के प्रमुख डॉ. अंकित अवस्थी ने तीन दिवसीय सम्मेलन का अवलोकन प्रस्तुत किया। डॉ. अवस्थी ने घोषणा की कि इसका अगला संस्करण अक्टूबर 2027 के शुरुआत में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय ने 2027 में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून और विकास पत्रिका (International Trade Law & Development Journal) शुरू करने की योजना की भी घोषणा की।
समापन समारोह में आयोजन टीम के निरंतर योगदान की सराहना की गई, जिनमें संकाय सदस्य सुश्री उर्वी श्रीवास्तव, डॉ. देबमिता मोंडल और डॉ. अंकित सिंह के साथ-साथ छात्र समन्वयक सुश्री अमृता नायर, सुश्री कृतिका सेंथिल कुमार, सुश्री सृष्टि शुक्ला और सुश्री प्रथा चौहान शामिल थीं। धन्यवाद ज्ञापन छात्र आयोजन समिति की ओर से सुश्री कृतिका सेंथिल कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया।
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