

तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता में झलकी हिंदी की प्रभावशीलता
Posted On: 26 SEP 2025 6:20PM by PIB Raipur
स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड- सेल -भिलाई इस्पात संयंत्र में राजभाषा विभाग द्वारा चल रहे राजभाषा पखवाड़ा कार्यक्रमों के अंतर्गत संयंत्र स्तरीय तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन इस्पात भवन स्थित सभागार में किया गया। हिंदी के प्रति जागरूकता और प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रतियोगिता ने प्रतिभागियों की वक्तृत्व कला और भाषाई कौशल को मंच प्रदान किया।


प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को मौके पर दिए गए विषयों पर तुरंत भाषण देना था। इनमें “ऑनलाइन गेमिंग और बच्चों पर प्रभाव”, “अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत की प्रगति”, “नारी शिक्षा: सामाजिक सुधार की कुंजी”, “समय प्रबंधन का महत्व”, “खेलों का जीवन में महत्व”, “कृषि संकट और समाधान” तथा “एक रहें-नेक रहें” जैसे सामयिक और सारगर्भित विषय शामिल थे। प्रतिभागियों ने अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर श्रोताओं को प्रभावित किया।

प्रतियोगिता में प्रथम स्थान उप महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा विभाग) सुश्री अमृता गंगराडे ने प्राप्त किया। द्वितीय स्थान शिक्षा विभाग के शिक्षक डॉ. शीतल चन्द्र शर्मा को मिला। तृतीय स्थान श्री विटेश्वर नाथ, उप प्रबंधक, सिंटरिंग प्लांट-3 को प्राप्त हुआ, जबकि प्रोत्साहन पुरस्कार प्लेट मिल के जूनियर इंजीनियरिंग एसोसिएट श्री सत्यनारायण मेहर को दिया गया।
इस अवसर पर महाप्रबंधक (संपर्क व प्रशासन, जनसंपर्क एवं प्रभारी राजभाषा) श्री राजीव कुमार उपस्थित रहे। निर्णायक मंडल में महाप्रबंधक (मानव संसाधन–संकाय) श्री संजय द्विवेदी और महाप्रबंधक (कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी) सुश्री शिवानी जत्रेले शामिल थीं।
कार्यक्रम के आरंभ में श्री राजीव कुमार ने कहा कि गृह मंत्रालय, भारत सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित नीतियों का पालन करना और हिंदी भाषी क्षेत्र छत्तीसगढ़ में निवासरत होने के नाते कार्यालयीन कार्य हिंदी में करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे न केवल हिंदी में कार्य करें बल्कि प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी कर हिंदी के प्रति अनुराग और समर्पण दिखाएं।
महाप्रबंधक (मानव संसाधन–संकाय) श्री संजय द्विवेदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि विदेश यात्राओं के दौरान भी उन्होंने देखा है कि भारतीय प्रवासी हिंदी बोलने में किसी प्रकार की झिझक नहीं दिखाते। यह हिंदी की वैश्विक पहचान और स्वीकार्यता का प्रमाण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें हिंदी में संवाद करने और उसके प्रचार-प्रसार को अपना कर्तव्य मानना चाहिए।
महाप्रबंधक (कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी) सुश्री शिवानी जत्रेले ने कहा कि हिंदी इतनी सरल और सरस भाषा है कि इससे हम अपनी भावनाओं को सटीक और स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त कर सकते हैं। हिंदी केवल ‘क’ क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारत में इसकी व्यापकता है। हिंदी में काम करने से हमें गर्व की अनुभूति होती है।
प्रतियोगिता के अंत में निर्णायकों ने प्रतिभागियों को अपनी वक्तृत्व शैली और प्रस्तुति कौशल को और निखारने के लिए उपयोगी सुझाव दिए। कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन उप प्रबंधक (संपर्क व प्रशासन–राजभाषा) श्री जितेन्द्र दास मानिकपुरी ने किया।








