

राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस पर AIIMS रायपुर में शोध एवं प्रकाशन विषयक BMJ कार्यशाला
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) रायपुर ने राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के अवसर पर बीएमजे पब्लिशिंग ग्रुप के सहयोग से शोध एवं प्रकाशन पर केंद्रित एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का विषय था — “केस रिपोर्ट कैसे प्रस्तुत करें एवं शोध से प्रकाशन तक के लाभ”। इस दौरान प्रतिभागियों को बीएमजे बेस्ट प्रैक्टिस से भी परिचित कराया गया, जो चिकित्सकीय त्रुटियों को कम करने, रोगी देखभाल में सुधार लाने और अस्पताल में भर्ती की अवधि घटाने में सहायक एक प्रमुख क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट टूल है।

यह पहल वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. शिवेंद्र सिंह द्वारा की गई। उन्होंने इस अवसर पर भारत में पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस.आर. रंगनाथन को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी पुस्तकालय विज्ञान के पाँच सिद्धांतों की आज भी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में केंद्रीय पुस्तकालय की सुश्री पुष्पलता भल्ला, श्रीमती रश्मि शर्मा और संपूर्ण स्टाफ मौजूद रहा।
एआईआईएमएस रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच संस्थान के शोधकर्ताओं को प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशन के लिए वैश्विक अवसर उपलब्ध कराते हैं, जिससे उनके कार्य को विश्वसनीय साक्ष्य के रूप में मान्यता मिलती है। उन्होंने क्लिनिकल वर्कफ़्लो में पॉइंट-ऑफ़-केयर टूल्स के एकीकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
डीन (अकादमिक) डॉ. ईली महापात्र ने कहा कि शोध संस्थान के मिशन का अभिन्न हिस्सा है, जबकि डीन (शोध) डॉ. अभिरुचि गल्होत्रा ने एआईआईएमएस रायपुर की तीन प्राथमिकताओं — उत्कृष्ट रोगी देखभाल, विश्वस्तरीय चिकित्सा शिक्षा और उच्च गुणवत्ता वाले शोध का संचालन एवं प्रकाशन — को रेखांकित किया। विशेष आमंत्रित के रूप में उप निदेशक (प्रशासन) लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मवीर सिंह चौहान भी उपस्थित थे।
कार्यशाला का संचालन बीएमजे की सुश्री पूजा डबराल ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को बीएमजे केस रिपोर्ट तैयार करने एवं प्रस्तुत करने की प्रक्रिया, रिसर्च टू पब्लिकेशन प्रोग्राम के लाभ, और बीएमजे की ओपन एक्सेस सदस्यता के बारे में जानकारी दी। सत्र का समापन संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ, जिसमें शोध से जुड़ी प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।
आरडीजे/केआरवी/पीजे








