







समारोहों ने नवाचार, अनुसंधान, सतत विकास और शैक्षणिक गतिविधियों हेतु संस्थान की अवसंरचना को सशक्त किया
Raipur chhattisgarh VISHESH / रायपुर, 29 मई 2026 राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान रायपुर में परिसर के भीतर सात नई अवसंरचना सुविधाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास समारोह आयोजित किए गए। ये परियोजनाएँ शिक्षा, अनुसंधान, अतिथि-सत्कार, उद्यमिता तथा सतत विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित हैं। समारोह की अध्यक्षता बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के माननीय अध्यक्ष डॉ सुरेश हावरे ने की तथा इसमें संस्थान के माननीय निदेशक डॉ एन वी रमना राव, डीन, संकाय सदस्य, कर्मचारी, छात्र, पूर्व छात्र एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। ये पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप संस्थान की शैक्षणिक एवं अनुसंधान सुविधाओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

समारोह के दौरान चार नई सुविधाओं का औपचारिक उद्घाटन किया गया। गोल्डन टॉवर की दूसरी मंजिल पर लगभग 5,500 वर्गफुट क्षेत्र में लगभग 1 करोड़ रुपये की लागत से विकसित एनआईटी रायपुर एफआईई इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया। यह छत्तीसगढ़ का पहला डीएसटी-निधि टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर है, जो वर्तमान में क्लीन-टेक, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा बहुविषयक तकनीकी एकीकरण जैसे क्षेत्रों में 50 से अधिक स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान कर रहा है।
गोल्डन टॉवर के सामने सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन का भी शुभारंभ किया गया, जिसे विद्युत मंत्रालय की रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल योजना के अंतर्गत स्थापित किया गया है। इसमें 60 किलोवाट तक क्षमता वाले दो एसी/डीसी चार्जर लगाए गए हैं, जो स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय पहल का हिस्सा हैं।
गोल्डन टॉवर के समीप उच्च-वोल्टेज इम्पल्स परीक्षण प्रयोगशाला की आधारशिला रखी गई। 9.12 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस जी+2 परियोजना में सीएसपीटीसीएल द्वारा 1 करोड़ रुपये की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) सहायता प्रदान की गई है। यह प्रयोगशाला विद्युत प्रणाली अभियांत्रिकी एवं उच्च-वोल्टेज अनुप्रयोगों में अनुसंधान, परीक्षण एवं प्रशिक्षण को नई दिशा देगी तथा 15 माह में पूर्ण होने की संभावना है।
इसके साथ ही संस्थान के प्लेटिनम जुबली वर्ष की स्मृति में प्लेटिनम अतिथि गृह का शिलान्यास किया गया। लगभग 13.27 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह जी+5 भवन 20 सुसज्जित कमरों, सम्मेलन कक्ष एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा, जिससे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अतिथियों, विशेषज्ञों तथा गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत एवं आवास की क्षमता में वृद्धि होगी। इस परियोजना के 18 माह में पूर्ण होने की संभावना है।
इसके अतिरिक्त, 25.57 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नए जी+6 अकादमिक एनेक्स-I भवन का उद्घाटन किया गया। लगभग 4800 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र वाले इस भवन में 35 कक्ष हैं, जिनमें विभिन्न विभागों की कक्षाएँ तथा एनआईटीआरआरएफआईई इनक्यूबेशन सेंटर संचालित होगा। उद्घाटन श्रृंखला का समापन केंद्रीय पुस्तकालय में भारतीय ज्ञान परंपरा अनुभाग के शुभारंभ के साथ हुआ। इस अनुभाग में भारत की बौद्धिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक विरासत से संबंधित पुस्तकें, पांडुलिपियाँ, जर्नल एवं संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान से जोड़ा जा सके।
अकादमिक एनेक्स-I के पीछे स्थित क्षेत्र में मेकर्स्पेस एवं अनुसंधान सुविधा भवन की आधारशिला भी इस दौरान रखी गई। लगभग 16.91 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस जी+2 भवन में मेकर्स्पेस एवं टिंकरिंग प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी, जहाँ नवाचार एवं प्रोटोटाइप विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके साथ ही उन्नत अनुसंधान कार्यों हेतु समर्पित अनुसंधान परियोजना ब्लॉक भी विकसित किया जाएगा। यह परियोजना 12 माह में पूर्ण होने की अपेक्षा है।
इसके बाद भारतीय ज्ञान परम्परा केंद्र, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर द्वारा आज केंद्रीय पुस्तकालय भवन स्थित आईकेएस पुस्तकालय में “आईकेएस पुस्तकालय उद्घाटन समारोह” का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम माननीय अध्यक्ष, शासी निकाय, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर, डॉ. सुरेश हावरे जी तथा माननीय निदेशक, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर, डॉ. एन. वी. रमना राव जी की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। आईकेएस पुस्तकालय का उद्देश्य भारतीय दर्शन, विज्ञान, साहित्य, संस्कृति, गणित, आयुर्वेद, वास्तु, योग एवं अन्य पारंपरिक ज्ञान-विषयों से संबंधित साहित्य एवं शोध सामग्री को विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए उपलब्ध कराना है। यह पुस्तकालय भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण, संवर्धन एवं अकादमिक अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करेगा।
इस अवसर पर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ सुरेश हावरे ने योजना एवं विकास टीम की समयबद्ध कार्यान्वयन क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान नवाचार, समावेशिता, सतत विकास एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर आधारित आधुनिक परिसर के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। संस्थान के निदेशक डॉ एन वी रमना राव, ने कहा कि स्टार्टअप इनक्यूबेशन, सतत परिवहन, उच्च-वोल्टेज अनुसंधान, अतिथि-सत्कार, शैक्षणिक शिक्षण, मेकरस्पेस आधारित नवाचार तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित ये नई सुविधाएँ संस्थान की समग्र एवं दूरदर्शी विकास नीति को दर्शाती हैं। उन्होंने इन पहलों को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी हितधारकों को बधाई दी।





















