
Raipur chhattisgarh VISHESH /इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस वजह से कि किसी की शादी रजिस्टर्ड नहीं है, इसे अवैध नहीं माना जा सकता और न ही इस कारण तलाक की प्रक्रिया में कोई रुकावट आएगी. यह मामला आजमगढ़ के निवासी सुनील दुबे और उनकी पत्नी मीनाक्षी का था. इन दोनों ने 23 अक्टूबर 2024 को आपसी सहमति से फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दी थी. हालांकि, फैमिली कोर्ट ने इस अर्जी को मंजूर करते हुए एक शर्त रखी उन्हें मैरिज सर्टिफिकेट जमा करना होगा, जो कि दोनों पक्षों के पास नहीं था. सुनील ने अदालत में बताया कि उनकी शादी 27 जून, 2010 को हुई थी, जब शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं था उनकी पत्नी भी इस बात से सहमत थीं, लेकिन फैमिली कोर्ट ने रजिस्ट्रेशन न होने के कारण तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया. इसके बाद, सुनील ने इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया. हाई कोर्ट की जस्टिस मनीष कुमार निगम की बेंच ने कहा कि शादी का रजिस्ट्रेशन केवल एक दस्तावेज़ है, जो शादी के प्रमाण के रूप में काम करता है, और यह शादी की वैधता का आधार नहीं है. हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि जब कानून खुद यह कहता है कि बिना रजिस्ट्रेशन के भी शादी वैध मानी जाती है, तो तलाक के लिए इसे अनिवार्य बनाना गलत है.






















