देश के हिसार में खुलने जा रही गधी के दूध की डेयरी — एक लीटर का सरकारी भाव 7 हजार रु ! ब्यूटी प्रोडक्ट में भी होता है इस्तेमाल

रिपोर्ट मनप्रीत सिंह 

रायपुर छत्तीसगढ़ विशेष : हिसार, कोरोना वायरस के खिलाफ नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। खासकर कोरोना बीमारी से निपटने के लिए घरेलू उपायों पर जोर दिया जा रहा है। दरअसल देश में पहली बार गधी के दूघ की डेयरी खुलने वाली है । गधी का दूध शरीर का इम्यून सिस्टम बढ़ाने में मदद करता है। देश में पहली बार राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीई) हिसार में हलारी नस्ल की गधी के दूध की डेयरी शुरू करने जा रहा है। इसके लिए एनआरसीई ने 10 हलारी नस्ल की गधियों की खरीदी की है। इन गधियों की ब्रीडिंग की जा रही है। ब्रीडिंग के बाद ही डेयरी का काम शुरु हो जाएगा। ऐसा कहा जाता है कि गुजरात की हलारी नस्ल की गधी का दूध औषधियों का खजाना है। इस गधी का दूध बाजार में दो हजार से लेकर 7 हजार रु लीटर बिकता है। इस दूध के इस्तेमाल के कैंसर, मोटापा, एलर्जी जैसी बीमारियों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है। ये दूध महिलाओं के रुप निखारने में भी कामयाब है, इस दूध से ब्यूटी प्रोडक्ट भी बनाए जाते हैं, जो काफी महंगे होते हैं। गधी का दूध निकालकर डेयरी शुरू करने के लिए एनआरसीई हिसार के केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र व करनाल के नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट के विज्ञानियों की सहायता भी ली जा रही है।  एनआरसीई की वरिष्ठ वैज्ञानिक की मानें तो कई बार गाय या भैंस के दूध से छोटे बच्चों को एलर्जी हो जाती है मगर हलारी नस्ल की गधी के दूध से कभी एलर्जी नहीं होती। इसके दूध में एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी एजीन तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में कई गंभीर बीमारियों से लड़ने की क्षमता का विकास करते हैं। इस दूध में नाममात्र का फैट होता है।

 

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