








MY Bharat और SAI की संयुक्त पहल में 150 से अधिक युवाओं ने लिया हिस्सा; खेलों के साथ नशामुक्त रहने का संकल्प
रस्साकशी में जोर आजमाते, कबड्डी में दमखम दिखाते और गिल्ली-डंडा खेलते युवाओं ने रविवार को रायपुर में स्वस्थ और नशामुक्त जीवन का संदेश दिया। छत्रपति शिवाजी महाराज आउटडोर स्टेडियम, बूढ़ा तालाब में MY Bharat और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 150 से अधिक युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

माय भारत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ के 100 सप्ताह के अभियान के छठे सप्ताह में आयोजित इस कार्यक्रम की थीम थी—‘पारंपरिक खेल: हमारी विरासत, हमारे खेल, हमारा गौरव।’ आयोजन ने युवाओं को भारतीय खेल परंपराओं से जोड़ते हुए शारीरिक सक्रियता, अनुशासन और नशे से दूर रहने का संदेश दिया।
रस्साकशी, कबड्डी और गिल्ली-डंडा के साथ योग एवं रस्सी कूद की गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। MY Bharat के युवा स्वयंसेवकों, SAI के एथलीटों और राज्य खेल प्राधिकरण के खिलाड़ियों ने इनमें सक्रिय सहभागिता की। सामूहिक खेलों के माध्यम से युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, आपसी सहयोग बढ़ाने और अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत सिंह छाबड़ा ने की। इस अवसर पर MY Bharat के राज्य निदेशक श्री अर्पित तिवारी, सहायक निदेशक श्री रमन पटेल, SAI के हाई परफॉर्मेंस कोच श्री कुशल चंद्र त्रिपाठी, श्री सतीश दुबे, श्रीमती रेणु पारिक, दुर्गा महाविद्यालय की श्रीमती सुनीता चंसोरिया, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव चौधरी तथा साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ श्री महेंद्र राजपूत उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में दुर्गा महाविद्यालय के MY Bharat स्वयंसेवकों ने नशामुक्ति पर प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों को उजागर करते हुए युवाओं को स्वस्थ जीवन अपनाने और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया। साथ ही, सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्ति की शपथ ली। युवाओं ने स्वयं नशे से दूर रहने, दूसरों को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
खेल, सहभागिता और संकल्प के इस संगम ने स्पष्ट संदेश दिया—अपनी विरासत से जुड़कर युवा स्वस्थ जीवन और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।








