







Raipur chhattisgarh VISHESH / रायपुर, छत्तीसगढ़ | तत्काल प्रकाशन हेतु
छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में सिरपुर के सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची (Tentative List) में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि राज्य की ऐतिहासिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सिरपुर, यूनेस्को की इस सूची में स्थान पाने वाला छत्तीसगढ़ का पहला स्थल है।

इस उपलब्धि के पीछे वास्तुत्व (Vastutvaa), कंज़र्वेशन आर्किटेक्ट निष्ठा जोशी एवं उनकी पूरी टीम के समर्पित प्रयास रहे हैं। टीम ने सिरपुर की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्ता को दस्तावेज़ित करने और उसे व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में कार्य किया है।
महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर भारत के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों में से एक है। प्राचीन काल में यह क्षेत्र धर्म, कला, स्थापत्य और ज्ञान का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ स्थित लक्ष्मण मंदिर, बौद्ध विहार, हिंदू मंदिर तथा जैन धर्म से जुड़े पुरातात्विक अवशेष इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और उत्कृष्ट स्थापत्य कला के साक्षी हैं। सिरपुर की विरासत विभिन्न धार्मिक परंपराओं के सह-अस्तित्व, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मध्य भारत के ऐतिहासिक विकास की महत्वपूर्ण कहानी प्रस्तुत करती है।
यूनेस्को की अस्थायी सूची में सिरपुर का शामिल होना संभावित विश्व धरोहर नामांकन की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है। इससे छत्तीसगढ़ की समृद्ध, किंतु अपेक्षाकृत कम पहचानी गई सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर ध्यान मिलने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही, यह उपलब्धि विरासत संरक्षण, शोध, सतत पर्यटन विकास और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
वास्तुत्व और इसकी टीम के लिए यह उपलब्धि केवल एक पेशेवर सफलता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह प्रयास इस बात को भी रेखांकित करता है कि व्यवस्थित दस्तावेज़ीकरण, संरक्षण संबंधी कार्य और विभिन्न हितधारकों के सहयोग से ऐतिहासिक स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है।
सिरपुर का यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। यह राज्य की विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करने, आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने और इसकी ऐतिहासिक महत्ता को व्यापक स्तर पर साझा करने की दिशा में एक नई शुरुआत है।
वास्तुत्व (Vastutvaa) के बारे में
वास्तुत्व वास्तु संरक्षण, विरासत दस्तावेज़ीकरण और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी पहलों के क्षेत्र में कार्यरत है। संस्था का उद्देश्य ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, उनके महत्व के दस्तावेज़ीकरण तथा उनकी सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में योगदान देना है।
मीडिया संपर्क:
प्रेस विज्ञप्ति
यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल हुआ सिरपुर का सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य, छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
रायपुर, छत्तीसगढ़ | तत्काल प्रकाशन हेतु
छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में सिरपुर के सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची (Tentative List) में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि राज्य की ऐतिहासिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सिरपुर, यूनेस्को की इस सूची में स्थान पाने वाला छत्तीसगढ़ का पहला स्थल है।
इस उपलब्धि के पीछे वास्तुव्वा (Vastutvaa), कंज़र्वेशन आर्किटेक्ट निष्ठा जोशी एवं उनकी पूरी टीम के समर्पित प्रयास रहे हैं। टीम ने सिरपुर की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्ता को दस्तावेज़ित करने और उसे व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में कार्य किया है।
महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर भारत के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों में से एक है। प्राचीन काल में यह क्षेत्र धर्म, कला, स्थापत्य और ज्ञान का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ स्थित लक्ष्मण मंदिर, बौद्ध विहार, हिंदू मंदिर तथा जैन धर्म से जुड़े पुरातात्विक अवशेष इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और उत्कृष्ट स्थापत्य कला के साक्षी हैं। सिरपुर की विरासत विभिन्न धार्मिक परंपराओं के सह-अस्तित्व, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मध्य भारत के ऐतिहासिक विकास की महत्वपूर्ण कहानी प्रस्तुत करती है।
यूनेस्को की अस्थायी सूची में सिरपुर का शामिल होना संभावित विश्व धरोहर नामांकन की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है। इससे छत्तीसगढ़ की समृद्ध, किंतु अपेक्षाकृत कम पहचानी गई सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर ध्यान मिलने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही, यह उपलब्धि विरासत संरक्षण, शोध, सतत पर्यटन विकास और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
वास्तुत्व और इसकी टीम के लिए यह उपलब्धि केवल एक पेशेवर सफलता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह प्रयास इस बात को भी रेखांकित करता है कि व्यवस्थित दस्तावेज़ीकरण, संरक्षण संबंधी कार्य और विभिन्न हितधारकों के सहयोग से ऐतिहासिक स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है।
सिरपुर का यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। यह राज्य की विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करने, आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने और इसकी ऐतिहासिक महत्ता को व्यापक स्तर पर साझा करने की दिशा में एक नई शुरुआत है।
वास्तुत्व (Vastutvaa) के बारे में
वास्तुव्वा वास्तु संरक्षण, विरासत दस्तावेज़ीकरण और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी पहलों के क्षेत्र में कार्यरत है। संस्था का उद्देश्य ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, उनके महत्व के दस्तावेज़ीकरण तथा उनकी सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में योगदान देना है।
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वास्तुत्व (Vastutvaa)
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