




बोरिद गाँव, महासमुंद में हाशिए पर बसे समुदायों के सशक्तिकरण हेतु विधिक संवाद
Raipur chhattisgarh VISHESH हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचएनएलयू), रायपुर की विधिक सहायता एवं सामाजिक सेवा समिति (एलएसएससी) और सेंटर फॉर लॉ एंड इंडिजेनस स्टडीज ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), महासमुंद तथा निर्मया कैंसर फाउंडेशन, रायपुर के सहयोग से बोरिद गाँव, जिला महासमुंद में “स्वदेशी न्याय एवं विधिक जागरूकता” विषय पर एक दिवसीय क्षेत्रीय भ्रमण एवं कार्यशाला का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम में 34 छात्र स्वयंसेवक एवं 5 शिक्षण संकाय सदस्य — डॉ. कौमुदी छल्ला, डॉ. अयान हाजरा, डॉ. अर्चना श्याम घरोटे, श्री प्रदीप बर्मन और श्री दीपक कुमार — ने भाग लिया। इनके साथ निर्मया कैंसर फाउंडेशन से सुश्री सुदेशना तथा डीएलएसए महासमुंद से एडवोकेट संजीव कुमार पांडा, उप प्रमुख (कानूनी एवं रक्षा परिषद प्रणाली) और एडवोकेट डोला मणि पटेल उपस्थित रहे।
एचएनएलयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन ने कहा कि इस प्रकार की क्षेत्रीय गतिविधियाँ विधि छात्रों को जनजातीय समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक वास्तविकताओं से परिचित कराती हैं, जिससे उन्हें व्यावहारिक विधिक प्रशिक्षण प्राप्त होता है और वे अधिक संवेदनशील एवं जिम्मेदार नागरिक बनते हैं।
टीम ने प्रातः विश्वविद्यालय परिसर से प्रस्थान कर लगभग 83 किलोमीटर दूर स्थित बोरिद गाँव पहुँची, जहाँ विद्यार्थियों ने घर-घर जाकर ग्रामीणों से संवाद किया और उनके शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचे एवं सामाजिक-आर्थिक स्थितियों पर सर्वेक्षण किया।
कार्यशाला का शुभारम्भ गाँव के सरपंच श्री अजयमंगल सिंह ध्रुव के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने एचएनएलयू की पहल की सराहना करते हुए ग्रामीण समुदाय की बुनियादी समस्याओं एवं महिलाओं से जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। एलएसएससी की संकाय संयोजक डॉ. कौमुदी छल्ला ने हाशिए पर बसे समुदायों को सशक्त बनाने में विधिक सहायता की भूमिका पर बल दिया, जबकि सेंटर फॉर लॉ एंड इंडिजेनस स्टडीज के प्रमुख डॉ. अयान हाजरा ने न्याय तक पहुँच और अधिकारों की जागरूकता के लिए ग्रामीण एवं स्वदेशी आबादी से सीधा संवाद आवश्यक बताया।
डीएलएसए महासमुंद के एडवोकेट संजीव कुमार पांडा और एडवोकेट डोला मणि पटेल ने निःशुल्क कानूनी सहायता की प्रक्रिया, दैनिक कानूनी मुद्दों, यातायात चालान, छोटे अपराध और घरेलू हिंसा जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया। चर्चा में शराब के दुरुपयोग, घरेलू हिंसा और टोनही प्रथा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कानूनी अधिकारों और उपायों पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
संकाय सदस्य श्री दीपक कुमार ने महिला अधिकारों और सामाजिक प्रथाओं पर विचार-विमर्श का नेतृत्व किया। कार्यशाला के अंत में डीएलएसए महासमुंद द्वारा ग्रामीणों को पर्चे और सूचना सामग्री वितरित की गई। धन्यवाद ज्ञापन श्री प्रदीप बर्मन ने दिया, जिन्होंने संकाय, अधिवक्ताओं, गैर-सरकारी संगठनों और ग्रामीणों के सहयोग की सराहना की।
कार्यशाला के पश्चात टीम ने दूसरे चरण का सर्वेक्षण करते हुए गाँव के सभी 52 परिवारों से संवाद किया और उन्हें संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा शिक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दी।
सर्वेक्षण के दौरान सामने आए प्रमुख मुद्दों में सड़क एवं परिवहन सुविधाओं की कमी, स्वच्छ पेयजल के स्थायी स्रोत का अभाव, इंटरनेट कनेक्टिविटी की दिक्कतें, स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव और शिक्षा के सीमित अवसर शामिल रहे।
इस पहल ने न केवल विधि छात्रों को ग्रामीण भारत की वास्तविकताओं से जोड़ा, बल्कि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों द्वारा विधिक एवं सामाजिक आउटरीच की भूमिका को भी सशक्त बनाया। एचएनएलयू के कुलपति प्रो. वी. सी. विवेकानंदन और रजिस्ट्रार डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से यह क्षेत्रीय कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।








