


Raipur chhattisgarh VISHESH छत्तीसगढ़ की मिट्टी में जहां परंपरा और संघर्ष एक साथ चलते हैं, वहीं एक नई क्रांति ने जन्म लिया है, एक ऐसी पहल जो महिलाओं के जीवन को बदल रही है, एक समूह, एक उद्यम और एक सपना एक साथ लेकर। इस परिवर्तन की अगुवाई कर रहा है भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको), जो केवल औद्योगिक प्रगति ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में भी अग्रणी है। बालको का सामुदायिक विकास मॉडल केवल दान या सहायता नहीं, बल्कि एक ऐसा मॉडल है जो साझा विकास और सामूहिक समृद्धि की नींव पर खड़ा है।
इसी सोच को साकार करने के लिए बालको ने वित्त वर्ष 2022 में अपने एनजीओ सहयोगी जीपीआर स्ट्रैटेजी एंड सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य था महिलाओं को स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना। बालको ने इन समूहों को सिर्फ संगठित करने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें निरंतर मज़बूत करने और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया। परियोजना के आरंभ से लेकर अब तक, एसएचजी की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है और आज यह पहल 530 से अधिक समूह और 5,800 से अधिक महिलाओं को एकजुट कर चुकी है, जो अब बदलाव की कहानी खुद लिख रही हैं।

प्रोजेक्ट उन्नति की नींव केवल कौशल प्रशिक्षण या रोजगार तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका मूल उद्देश्य था महिलाओं में आत्मविश्वास भरना, उनके खोए हुए स्वाभिमान को लौटाना और उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाना। बालको की यह गहरी सोच कि “हमारा संचालन का अधिकार हमें हमारे आसपास के लोगों से प्राप्त होता है। इसी भावना ने समुदाय को इस परियोजना का सच्चा साझेदार बनाया और हर पहल में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की।
परियोजना के माध्यम से महिलाओं ने केवल कौशल नहीं सीखा, बल्कि अपने हुनर को सार्थक उद्यमों में बदलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की। डेकोराटी, छत्तीस, ऊनाटी, ऊनाटेक्स, ऊनारी, क्लीनिंग यूनिट और मशरूम यूनिट जैसे सात प्रमुख माइक्रो उद्यमों ने मिलकर 47 विभिन्न उत्पादों का निर्माण शुरू किया है। इन उत्पादों में हर्बल गुलाल, पेपर बैग, रक्षा बंधन, मिट्टी की मूर्ति, कपड़े के मास्क और ऑक्सो-डिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन जैसे पर्यावरण हितैषी विकल्प शामिल हैं। विशेष रूप से छत्तीसा और ऊनारी को मिला एफएसएसएआई और आईएसओ प्रमाणन इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाएं भी उच्च गुणवत्ता और व्यावसायिक मानकों को पूरा कर सकती हैं। साथ ही 65 नैनो उद्यमों में 118 महिलाएं टिफिन सेवा, सिलाई, दोना-पत्तल निर्माण जैसे कार्यों के माध्यम से अपना आर्थिक भविष्य स्वयं गढ़ रही हैं, ये सभी प्रयास महिलाओं में न केवल आत्मविश्वास जगा रहे हैं, बल्कि उन्हें सशक्त उद्यमी भी बना रहे हैं।
इन महिलाओं की मेहनत को पूरे देश ने सराहा। दिल्ली हाट में वेदांता कल्चर फेस्टिवल, टेकनेक्स पाली महोत्सव और कोरबा राज्योत्सव जैसे आयोजनों में भागीदारी ने उनके उत्पादों को पहचान दिलाई। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित उन्नति उत्सव में 1000 से अधिक महिलाएं, किशोरियाँ और बालको कर्मचारी एक मंच पर आए। महिलाओ ने 20 से अधिक स्टॉल लगाए गए और 16 महिलाओं को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
प्रोजेक्ट उन्नति की सबसे बड़ी उपलब्धि उसके आँकड़ों से कहीं आगे, महिलाओं की सोच और आत्मविश्वास में आए बदलाव में छिपी है। आज ये महिलाएं केवल गृहिणी नहीं, बल्कि अपने परिवारों की निर्णयकर्ता, अपने गांवों की उद्यमी और दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। वे बैंकिंग से लेकर व्यवसाय तक, हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। जहां कभी सपनों को दबा दिया जाता था, अब वहीं सपनों को साकार करने की हिम्मत और संसाधन दोनों मौजूद हैं। जब एक महिला सशक्त होती है, तो एक परिवार समृद्ध होता है, एक गांव तरक्की करता है और एक देश आगे बढ़ता है। यही है प्रोजेक्ट उन्नति, सिर्फ नाम नहीं, बदलाव की पहचान।








