
भाजपा सरकार का तरक्की और सुशासन का ये कैसा सफर है जिसमें स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार के रूप में दूर दूर तक दूंद नजर आ रही है।
बीपी, डायबिटीज, हार्ट व अन्य दूसरी गंभीर बीमारियों की समय पर दवा नहीं मिलने से होने वाली जनहानि को कौन होगा जवाबदार.?

कई स्टाफ को जैम पोर्टल से खरीदी की जानकारी नहीं होने की बात सामने आ रही
आंबेडकर अस्पताल में पेंशनरों को नहीं मिल रही दवा… दर दर भटकने मजबूर बुजुर्ग पेंशनर
एक ओर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सरकार राज्य के विकास के लिए कृतसंकल्पित हैं। तरक्की और सुशासन का ये कैसा सफर है जिसमें स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार के रूप में दूर दूर तक दूंद नजर आ रहा है। एक ओर जहा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और नई सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दे रहे है वहीं दूसरी ओर पेंशनरो को बीपी, डायबिटीज, हार्ट व अन्य दूसरी गंभीर बीमारियों की समय पर दवा नहीं मिलने से होने वाली जनहानि की कोन लेगा जवाबदारी l एक तरफ राज्य मे चार नवीन मेडिकल कालेजों के भवन के लिए निविदा जारी कर दी गयी है, और दूसरी ओर पुरानी सुविधाएं टप पडी है l
अम्बेडकर अस्पताल में उपकरण से लेकर जरूरी दवाइयां जैम पोर्टल से खरीदने है। कई स्टाफ को इसकी जानकारी नहीं होने की बात सामने आ रही है। जेम्स में खरीदने के पहले ये भी देखना होगा कि दवा उपलब्ध है कि नहीं। उदाहरण के लिए री-एजेंट जैम पोर्टल में लिस्टेड ही नहीं है। इस कारण इसे टेन्डर के माध्यम से खरीदा जा रहा है।
Raipur chhattisgarh VISHESH अम्बेडकर अस्पताल मे पैशनरों को दवा नहीं मिल रही है। इसके कारण उन्हें परेशानी हो रही है। इन दवाओं में महीनेभर चलने वाली बीपी, डायबिटीज, हार्ट व दूसरी बीमारियों की दवा है। पेशनरो का कहना है कि नियमित दवा नहीं मिलने से उन्हें खरीदकर दवा खानी पड़ रही है। बताया जा रहा है कि पेंशनरों के लिए टेन्डर से दवा खरीदते हैं, टेंडर खत्म हो गया था लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने नया टेंडर नहीं किया। इस कारण दवा की खरीदी में दिक्कत हो रही है। वहीं प्रबंधन का दावा है कि सोमवार मंगलवार से पेशनरी को दवा मिलने लगेगी।

जेम से खरीदी, इसके बारे में जानकारी ही नहीं
अस्पताल में 1000 से ज्यादा पेंशनरों को दवा दी जाती है। इनमें रिटायर्ड डीएमई से लेकर डिन , हेड ऑफ डिपार्ट., प्रोफेसर, सहायक अधीक्षक व अन्य कर्मचारी है, जो यहां से दवा लेते हैं। इस बार जब पेशनर दवा लेने गए तो पता चला कि स्टॉक में दवा ही नहीं है। इसे लेकर स्टाफ के साथ वाद-विवाद की स्थिति भी बन गई। पेंशनरों का कहना है उन्हें कई बार समय पर दवा नहीं मिलती। इससे उन्हें मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर काम चलाना पड़ता है। हमारे द्वारा पड़ताल में पता चला है कि प्रबंधन ने नया टेंडर नहीं किया और पुराने वेंडर ने दवा सप्लाई करने से मना कर दिया गया है। नया टेंडर होने तक अस्पताल लोकल खरीदी कर पेंशनरों को दवा दी जाएगी।





















