
Report manpreet singh

Raipur chhattisgarh VISHESH दिल्ली, भारत में ज्यादातर हमलों के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ने अब अफगानिस्तान में भी जड़ें जमा ली हैं. तालिबान के कब्जे वाले अफगानिस्तान में ये दोनों आतंकी संगठन न सिर्फ कई ट्रेनिंग कैंप चलाते हैं, बल्कि सत्ताधारी तालिबान से भी उनके गहरे संबंध हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, यूएन की रिपोर्ट में एक सदस्य देश के हवाले से दावा किया गया है कि जैश-ए-मोहम्मद अफगानिस्तान के नंगरहार में आठ ट्रेनिंग कैंप चलाता है. इनमें से तीन तो सीधे तालिबान के नियंत्रण में हैं. लश्कर ने कुनार और नंगरहार में तीन कैंप बना रखे हैं.
संयुक्त राष्ट्र की अफगानिस्तान पर ताजा रिपोर्ट में ये खुलासा करते हुए बताया गया है कि पाकिस्तान की शह पर आतंकवाद फैलाने वाले लश्कर और जैश के सरगनाओं की तालिबान के टॉप नेताओं से भी मुलाकातें होती रहती हैं.इनकी तालिबान नेताओं से सांठगांठ का खुलासा करते हुए बताया गया है कि इसी साल जनवरी में तालिबान के एक दल ने नंगरहार के हस्का मेना जिले में लश्कर के एक ट्रेनिंग कैंप का दौरा भी किया था. इससे पहले अक्टूबर 2021 में लश्कर के नेता मावलवी असदुल्ला की तालिबान के डिप्टी आंतरिक मंत्री नूर जलील से मुलाकात हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, जैश वैचारिक रूप से तालिबान के ज्यादा करीब है. मसूद अजहर की अगुआई वाले इस संगठन ने कारी रमजान को अफगानिस्तान में नया सरगना बनाया है जबकि लश्कर का वहां पर कर्ताधर्ता मावलवी यूसुफ है.एक्सप्रेस ने यूएन मॉनिटरिंग कमिटी की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि अल कायदा के भारतीय उपमहाद्वीप में सक्रिय गुट (AQIS) में 180 से 400 लड़ाके हैं. इनमें बांग्लादेश, भारत, म्यांमार और पाकिस्तान के नागरिक शामिल हैं.
ये अफगानिस्तान के गजनी, हेलमंद, कंधार, निमरुज, पक्तिका और ज़ाबुल प्रांत में मौजूद हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि अल कायदा को अफगान के नए शासन में ज्यादा आजादी है लेकिन अगले एक-दो साल तक उसके अफगानिस्तान के बाहर सीधे हमला करने की संभावना नहीं है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस्लामिक स्टेट (खोरासान ग्रुप) ISIL-K जैसे समूहों की ताकत पिछले कुछ समय में कम हुई है और वह 2023 तक देश के बाहर हमला करने की स्थिति में नहीं है.





















