
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग तथा यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “ई-प्रौद्योगिकी के माध्यम से मौखिक एवं लिखित संप्रेषण कौशल के उन्नयन” विषय पर 10 से 14 मार्च 2026 तक एक सप्ताह की आभासी कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
कार्यशाला का उद्घाटन प्रोफेसर डॉक्टर एन. वी. रमण राव, निदेशक, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर द्वारा किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में डिजिटल युग में प्रभावी संप्रेषण कौशल के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर समीर बाजपेयी, विभागाध्यक्ष, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग ने भाषा अधिगम एवं व्यावसायिक संप्रेषण में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। वहीं प्रोफेसर एन. वी. स्वामी नायडू, विभागाध्यक्ष, यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग ने तकनीकी शिक्षा के साथ संप्रेषण कौशल के समन्वय की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यशाला में विभिन्न प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। डॉ. वागीशा मिश्रा (सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत) ने मोबाइल-सहायित भाषा अधिगम, तकनीकी संप्रेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरण तथा उच्चारण और श्रवण कौशल सुधारने के डिजिटल मंचों पर व्याख्यान दिए। डॉ. सुपर्णा कारकुन (एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर) ने सामाजिक माध्यमों के द्वारा व्यावसायिक पहचान निर्माण तथा उद्यमिता आधारित कहानी-कथन पर चर्चा की। डॉ. अशोक (उस्मानिया विश्वविद्यालय) ने ऑनलाइन परियोजना आधारित शिक्षण के माध्यम से नेतृत्व और टीम कार्य पर अपने विचार रखे। डॉ. एम. श्रीधर (आंध्र विश्वविद्यालय) ने अनुकूली भाषा अधिगम तकनीकों और सॉफ्ट स्किल्स पर व्याख्यान दिया, जबकि डॉ. नवीन जुलूरु (अनुराग विश्वविद्यालय) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित लेखन सहायक उपकरणों तथा डिजिटल संप्रेषण में भावनात्मक बुद्धिमत्ता पर चर्चा की।
इसके अतिरिक्त डॉ. अरुणा शुक्ला (अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, नया रायपुर), डॉ. शिल्पी भट्टाचार्य, डॉ. अथर खान, तथा डॉ. गणेश पी. शुक्ला ने अंतर-सांस्कृतिक संप्रेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक पहलुओं, डिजिटल साक्षरता तथा ऑनलाइन शिष्टाचार जैसे विषयों पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर से डॉ. अनुप कुमार तिवारी ने संप्रेषण कौशल को सुदृढ़ बनाने हेतु हाइब्रिड शिक्षण तथा ऑनलाइन सिमुलेशन पर सत्र संचालित किया, जबकि डॉ. वाई. विजय बाबू ने आभासी बैठकों की भूमिका के माध्यम से प्रस्तुतीकरण और वार्ता कौशल को सशक्त बनाने पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला का समापन एक समापन सत्र के साथ हुआ, जिसमें डॉ. अनुप कुमार तिवारी, सह प्राध्यापक, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग ने कार्यक्रम की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके पश्चात प्रोफेसर समीर बाजपेयी ने कार्यशाला पर अपने विचार साझा किए तथा प्रोफेसर एन. वी. स्वामी नायडू ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए तकनीकी दक्षता के साथ संप्रेषण कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का औपचारिक समापन डॉ. वाई. विजय बाबू द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
कार्यशाला के संयोजक डॉ. अनुप कुमार तिवारी तथा समन्वयक डॉ. वाई. विजय बाबू एवं डॉ. सूरज कुमार मुक्ति रहे। आयोजन समिति में अक्षय कुमार साहू, मनसिया पंडित, निकहत परवीन, पूनम शुक्ला, प्रेमलता सिन्हा, प्रतीक्षा जेठालाल परमार, नीलिमा सिंह तथा रितेश कुमार श्रीवास्तव शामिल रहे, जिनके सहयोग से कार्यक्रम का सफल आयोजन संभव हो सका।
कार्यशाला के दौरान प्रस्तुत विषयवस्तु प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रासंगिक रही। कार्यक्रम के सफल संचालन की सराहना सभी प्रतिभागियों, मुख्य अतिथियों तथा अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा की गई और इसे एक अत्यंत सार्थक, ज्ञानवर्धक एवं प्रभावी शैक्षणिक पहल बताया गया।






















